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दिग्वाससे नमः : शिव के ‘दिग्वासस्’ स्वरूप का दार्शनिक, आध्यात्मिक एवं प्रतीकात्मक विवेचन

शिव-सहस्रनाम के ‘दिग्वासस्’ नाम की व्युत्पत्ति, शास्त्रीय प्रमाण, पौराणिक प्रसंग, मनोवैज्ञानिक अर्थ, दार्शनिक विश्लेषण तथा आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता पर आधारित शोधपरक हिन्दी भाष्य। https://medium.com/@shivvyom/digvāsas-what-it-means-for-shiva-to-be-clothed-in-the-directions-93eed251dbb4 १. प्रस्तावना वस्त्र मनुष्य की सभ्यता का प्रतीक है। वस्त्र पहनना अर्थात् समाज में प्रवेश करना, मर्यादा स्वीकार करना, सीमाओं को अपनाना। और वस्त्र का त्याग? — वह या…
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ॐ परमाय मन्त्राय नमः : शिव क्यों कहलाते हैं परम मन्त्र? एक शास्त्रीय एवं दार्शनिक अध्ययन

1. प्रस्तावना भारतीय चिन्तन-परम्परा में मन्त्र की अवधारणा केवल ध्वन्यात्मक संरचना तक सीमित नहीं रही। मन्त्र को वहाँ एक ऐसी चेतना-शक्ति के रूप में जाना गया है जो वाणी और अर्थ की द्वैत-सीमा से परे जाकर साधक की अन्तर्चेतना को एक विशेष आयाम में प्रतिष्ठित करती है। जब शिव-सहस्रनाम में शिव को ‘परम मन्त्र’ कहा…