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  • नागहारधृक् — जहाँ भय शिव के कंठ में आभूषण बन जाता है।

    नागहारधृक् — जहाँ भय शिव के कंठ में आभूषण बन जाता है।

    ॐ नागहारधृक् नमः – सर्पों की माला धारण करने वाले भाव-गुण श्रेणी : अलंकरण, भस्म एवं व्याघ्रचर्म स्वरूप १. प्रस्तावना शिव-सहस्रनाम में प्रत्येक नाम एक-एक दर्शन-सूत्र है, जो शिव-तत्त्व के किसी विशिष्ट आयाम को उद्घाटित करता है। “नागहारधृक्” नाम इसी शृंखला में शिव के उस स्वरूप का बोध कराता है, जिसमें वे भयंकरतम, विषैले तथा…

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  • ॐदग्धिताञ्जनाभासायनमः – जले हुए अंजन/भस्म की आभा वाले

    ॐदग्धिताञ्जनाभासायनमः – जले हुए अंजन/भस्म की आभा वाले

    भाव-गुण श्रेणी : अलंकरण एवं भस्म-स्वरूप १. प्रस्तावना शिव-सहस्रनाम में कुछ नाम ऐसे हैं, जो शिव के बाह्य रूप का वर्णन प्रत्यक्ष रूप से नहीं करते, अपितु उस रूप की तुलना किसी सुपरिचित वस्तु के गुण-धर्म से करते हैं—अर्थात् वे नाम “जैसा” (सादृश्यवाचक) की प्रविधि से शिव के तेज, वर्ण अथवा आभा को स्पष्ट करते…

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  • गजचर्मोत्तरीयाय: भगवान शिव हाथी की खाल क्यों धारण करते हैं?

    गजचर्मोत्तरीयाय: भगवान शिव हाथी की खाल क्यों धारण करते हैं?

    ॐ नमः शिवाय शिव-सहस्रनाम — नाम-व्याख्या-ग्रन्थ ॐ गजचर्मोत्तरीयाय नमः (गज-चर्म को उत्तरीय के रूप में धारण करने वाले) भाव-गुण श्रेणी : अलंकरण, संहार-लीला एवं चर्म-वस्त्र-स्वरूप १. प्रस्तावना शिव-सहस्रनाम में कुछ नाम शिव के तत्त्व-स्वरूप को व्यक्त करते हैं, तो कुछ नाम उनकी किसी विशिष्ट लीला की स्मृति को शब्द में सुरक्षित रखते हैं। “गजचर्मोत्तरीयाय” ऐसा…

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  • ॐभस्मप्रियाय नमः – भस्म लेपन से प्रेम करने वाले

    ॐभस्मप्रियाय नमः – भस्म लेपन से प्रेम करने वाले

    भाव-गुण श्रेणी: अलंकरण, भस्म एवं व्याघ्रचर्म स्वरूप १. प्रस्तावना  शिव-सहस्रनाम के भीतर कुछ नाम शिव के ऐश्वर्य को व्यक्त करते हैं, कुछ उनकी संहार-शक्ति को, कुछ उनकी करुणा को — किन्तु “भस्मप्रिय“ नाम एक भिन्न ही तल पर खड़ा है। यह नाम शिव के अलंकरण-सिद्धान्त से जुड़ा है, अर्थात् वे अपने शरीर को किस वस्तु…

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  • ॐव्याघ्रचर्माम्बरायनमः – व्याघ्र की खाल को वस्त्र बनाने वाले

    ॐव्याघ्रचर्माम्बरायनमः – व्याघ्र की खाल को वस्त्र बनाने वाले

    भाव-गुण श्रेणी : अलंकरण, भस्म एवं व्याघ्रचर्म स्वरूप १. प्रस्तावना शिव-सहस्रनाम में प्रयुक्त प्रत्येक नाम केवल शब्द नहीं, अपितु शिव-तत्त्व के किसी एक विशिष्ट आयाम का सूत्र-वाक्य है। “ॐ व्याघ्रचर्माम्बराय नमः” ऐसा ही एक नाम है, जो शिव के बाह्य रूप-वर्णन के भीतर छिपे एक गम्भीर आध्यात्मिक सन्देश की ओर संकेत करता है। स्थूल दृष्टि…

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  • ॐभर्गाय नमः – पापों को भस्म करने वाले तेज

    ॐभर्गाय नमः – पापों को भस्म करने वाले तेज

    भाव-गुण श्रेणी : अलंकरण, भस्म एवं व्याघ्रचर्म-स्वरूप १. प्रस्तावना शिव-सहस्रनाम के विशाल नाम-वैभव में कुछ नाम भगवान् शिव के किसी रूप, कर्म, आयुध अथवा कथा का संकेत करते हैं, जबकि कुछ नाम उनके सत्तात्मक स्वभाव और शिव-तत्त्व की गहनतम अनुभूति की ओर ले जाते हैं। “भर्ग” ऐसा ही एक अर्थगर्भित नाम है। यह केवल किसी…

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